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26 सितंबर 2020

हिन्दी साहित्य के परीक्षोपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य जो प्रतियोगी परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी हैं---–-


  • 1.आचार्य शुक्ल ने आदिकाल में देशभाषा काव्य में कितनी पुस्तकों की संख्या मानी है~~8
  • 2.” जनता की चित्तवृत्ति का संचित प्रतिबिंब ही साहित्य हैं “यह माना है~~ शुक्ल
  • 3.” भाषा सर्वेक्षण “के रचयिता है~~ जॉर्ज ग्रियर्सन
  • 4. पृथ्वीराज रासो कितने प्रकार के छंदों में लिखा गया है~~68
  • 5. उपदेश रसायन रास के रचयिता है~~ जिनदत्त सूरी
  • 6.पृथ्वीराज रासो काव्य किस कोटि का है~~वीरगाथा महाकाव्य
  • 7.”हिंदी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास ” ग्रंथ के लेखक है~~ रामकुमार वर्मा
  • 8.इतिहास लेखन की सबसे विकसित पद्धति है ~~विधेयवादी पद्धति
  • 9. विद्यापति ने कीर्तिलता को किस संवाद रूप में लिखा है ~~भृंग-भृंगी
  • 10.” राठौड़ा री ख्यात” के रचयिता है ~~दयालदास
  • 11. नाथों में “रसायनी” कौन थे ~~नागार्जुन
  • 12. कविराज श्यामलदास तथा काशी प्रसाद जायसवाल ने रासो की उत्पत्ति मानी है~~ रहस्य से
  • 13. “आध्यात्मिक रंग के चश्मे आजकल बहुत सस्ते हो गए हैं उन्हें चढ़ाकर कुछ लोगों ने गीतगोविंद के पद्यों को आध्यात्मिक संकेत बताया है वैसे ही विद्यापति के पद्यों को भी”- पंक्ति है ~~आचार्य शुक्ल
  • 14.काफिर बोध, पंचअग्नि, दयाबोध,अष्ट चक्र व रसराह ग्रंथ है ~~गोरखनाथ
  • 15. कयमास वध किस रचना का खंड है~~ पृथ्वीराज रासो
  • 16. उक्ति व्यक्ति प्रकरण के रचयिता है~~ दामोदर शर्मा
  • 17. “मनहुं कला ससीभान कला सोलह सो बनिय “- पंक्ति है~~ चंदबरदाई
  • 18. “राउलबेल”श्रृंगार परक चंपू काव्य के रचयिता है ~~रोडा कवि
  • 19. अपभ्रंश भाषा का प्रथम कवि माना जाता है ~~स्वयंभू
  • 20. स्वयं को ‘अभिमान मेरु’ कहा करते थे~~ पुष्पदंत

  • 21. आदिकाल को संधिकाल एवं चारण काल किसने कहा ~~रामकुमार वर्मा
  • 22. बौद्ध सिद्धों के पदों और दोहों को ‘ बौद्धगान ओ दोहा’ नाम से बांग्ला भाषा मे प्रकाशित किया~~ पंडित हरप्रसाद शास्त्री
  • 23. किरान- उस- सादेन रचना है ~~अमीर खुसरो
  • 24. ‘पुरुष परीक्षा’ किसकी संस्कृत में रचित रचना है~~ विद्यापति
  • 25. रिठेमणि चरिउ के रचयिता है~~ स्वयंभू
  • 26. कीर्तिलता की भाषा है ~~अवहट्ट
  • 27.भू- परिक्रमा के रचयिता है ~~विद्यापति
  • 28. जयमयंक जस चंद्रिका के रचयिता है~~ मधुकर कवि
  • 29. इयाश्रय काव्य की रचना की है~~ हेमचंद्र
  • 30. ‘कुमारपाल प्रतिबोध’ गद्य पद्य में प्राकृत काव्य लिखा है~~ सोमप्रभ सुरि

  • 31. गोरखनाथ में किसके योग का सहारा लेकर ‘हठयोग’ का प्रवर्तन किया~~ पतंजलि
  • 32. ‘रत्नाकर जोपम कथा’ किस संप्रदाय का मानक ग्रंथ है~~ सिद्धों का
  • 33.” जिमि लोण बिलिज्जई पाणी एहि तिमि धरणी लई चित्त” कथन है ~~कणहप्पा
  • 34. “गंगा जऊना माझे बहई रे नाइ”है- उक्ति है~~ डोम्भीपा
  • 35. “काआ तरुवर पंच बिड़ाल” उक्ति है~~ लुइपा
  • 36. सिद्धों में सबसे पुराने माने जाते हैं~~ सरहपा
  • 37. अपभ्रंश नाम पहले-पहल किस के शिलालेख में मिलता है~~ वल्लभी राजा धारसेन द्वितीय
  • 38. “उस समय जैसे ‘गाथा’ या ‘गाहा’ कहने से प्राकृत का बोध होता था वैसे ही दोहा या दूहा कहने से अपभ्रंश का” कथन के लेखक है~~ रामचंद्र शुक्ल
  • 39. ‘देशी नाममाला’ किसकी रचना है~~ हेमचंद्र
  • 40. हजारी प्रसाद द्विवेदी, विश्वनाथ प्रसाद मिश्र तथा चंद्रबली पांडेय ने रासो की उत्पत्ति मानी है~~ रासक

  • 41. हरप्रसाद शास्त्री ने रासो की उत्पत्ति मानी है~~ राजयश
  • 42.आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने रासो की उत्पत्ति मानी है ~~रसायण
  • 43. पृथ्वीराज रासो की रचना विधान में सर्वाधिक विवादास्पद पक्ष है~~ ऐतिहासिकता
  • 44. ‘कन कंड चरिउ’ के रचयिता है~~ कनकामर मुनि
  • 45.’प्राकृत प्रकाश’ के रचयिता ~~वररुचि
  • 46. ढोला मारु रा दुहा के रचयिता~~ कुशललाभ
  • 47. सबसे पहले बारहमासा वर्णन किस रचना में मिलता है ~~बीसलदेव रासो 
  • 48. आदिकाल को अपभ्रंश काल कहा ~~धीरेंद्र वर्मा
  • 49. बारह बरीस लौ कूकर जीवे, और तेरह लौ जिये सियार।
  • बरिस अठारह छत्री जीवे, आगे जीवन को धिक्कार।। उक्त पंक्ति है~~जगनिक
  • 50. आदिकाल को ‘बीजवपन काल’ कहा है~~महावीर प्रसाद द्विवेदी

  • 51. दोहाकोश किसकी रचना है ~~सरहपा
  • 52. मैथिल कोकिल कहे जाते हैं ~~विद्यापति
  • 53.रणमल छंद की रचना की~~ श्रीधर
  • 54. आल्हाखंड नाम से कौन सी रचना प्रसिद्ध है~~ परमाल रासो
  • 55. “पद्मावती समय” किस रचना का खंड है~~ पृथ्वीराज रासो
  • 56. राजमती और बीसलदेव की कथा किस ग्रंथ में है~~ बीसलदेव रासो
  • 57.वर्ण रत्नाकर ग्रंथ के रचयिता है~~ ज्योतिरीश्वर
  • 58. नाथ- संप्रदाय के रचयिता है~~ हजारी प्रसाद द्विवेदी
  • 59. शिलांकित चंपू गेय काव्य रचना है~ राउलबेल
  • 60. दो सुखने, खलिकबारी आदि रचनाएं हैं~ अमीर खुसरो

  • 61. प्राण-संकली,सबदी, नरवैबोध, आत्मबोध और पंचमात्रा रचनाएं हैं~~ गोरखनाथ
  • 62.गोरखनाथ की रचनाओं को ‘गोरखबानी’ नाम से संपादित किया ~~पीतांबर दत्त बड़थ्वाल
  • 63.”पुस्तक जल्हण हत्थ दै, चलि गज़्ज़न नृज काज” पंक्ति है~ जल्हण
  • 64. ‘चन्द हिंदी के प्रथम महाकवि माने जाते हैं और इनका पृथ्वीराज रासो हिंदी का प्रथम महाकाव्य है’ कथन के लेखक है~~ आचार्य शुक्ल
  • 65.’पृथ्वीराज रासो’ को डॉक्टर श्यामसुंदर दास, मोहनलाल विष्णु लाल पंड्या, मिश्र बंधुओं एवं कर्नल टॉड मानते हैं~~ प्रामाणिक
  • 66.हजारी प्रसाद द्विवेदी, मुनि जिन विजय, सुनीति कुमार चटर्जी आदि ‘पृथ्वीराज रासो’ को मानते हैं~~ अर्धप्रमाणिक
  • 67.पृथ्वीराज रासो में कितने सर्ग या समय है~~69
  • 68.”बज़्ज़िय घोर निसान रान चौहान चहुँ दिसि” पंक्ति है~~ चंदबरदई
  • 69. संदेश रासक किस प्रकार का काव्य है~~ खंडकाव्य
  • 70. पृथ्वीराज रासो को पूरा किया था~~ जल्हण ने

  • 71.’परमात्म-प्रकाश’ और ‘योगसार’ किसकी रचना है~~ जोइंदु
  • 72. पाहुड़दोहा के रचयिता है~~ मुनि रामसिंह
  • 73. सरहपाद,सरोजवज्र व राहुलभद्र आदि नामों से कौन जाना जाता है~`सरहपा
  • 74.अक्षरद्विकोपदेश,डोम्बिगीतिका व योगचार्य किसकी रचनाएं हैं~~डोम्बिपा
  • 75. ‘श्रावकाचार’ व दब्ब-सहाव-पयास, लघुनयचक्र और दर्शनसार ग्रन्थ है~~देवसेन
  • 76. भरतेश्वर-बाहुबली रास खंड काव्य ग्रंथ लिखा~~ शालिभद्र सूरी
  • 77. ‘स्थूलीभद्र रास’ किसकी रचना है~~ जिनधर्म सुरि
  • 78. रेवंतगिरी रास रचना है ~~विजयसेन सुरि
  • 79. ‘नेमिनाथ रास’ नामक ग्रंथ की 58 छंदों में रचना की~~सुमतिगणि
  • 80. नाथ संप्रदाय को ‘अवधूत संप्रदाय’, ‘योग संप्रदाय’ कहा है~~ हजारी प्रसाद द्विवेदी

  • 81. डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा किस रचना में हिंदी साहित्य को अखिल भारतीय साहित्य से सम्बद्ध करने का प्रयास हुआ है~~ हिंदी साहित्य की भूमिका
  • 82.’आधुनिक हिंदी साहित्य का विकास’ किसके द्वारा लिखित है~~ श्री कृष्णलाल
  • 83.’हिंदी पुस्तक साहित्य’ को आधुनिक साहित्य संपत्ति का बीजक किसने कहा है~~ डॉ• माता प्रसाद गुप्त
  • 84.’हिंदी साहित्य और संवेदना का विकास’ लिखा गया~~ डॉ. रामस्वरूप चतुर्वेदी
  • 85.’हिंदी साहित्य का वैज्ञानिक इतिहास’ में संपूर्ण इतिहास को डॉ. गणपति चंद्र गुप्त ने कितने काल खंडों में विभाजित किया है~~ आदिकाल, मध्यकाल और आधुनिक काल
  • 86.हिंदी साहित्य का सर्वाधिक व्यवस्थित और प्रथम इतिहास है~~ हिंदी साहित्य का इतिहास(शुक्ल)
  • 87.अपभ्रंश साहित्य को हिंदी साहित्य से अलग मानकर उसे पूर्व पीठिका के रूप में किसने प्रस्तुत किया ~~आचार्य शुक्ल
  • 88.आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने काल विभाजन का प्रधान आधार क्या माना~~ जनता की चित्तवृत्ति के परिवर्तन को
  • 89.शुक्ल कृत हिंदी साहित्य का इतिहास में आदिकाल का नाम जो सर्वाधिक विवादास्पद रहा ~~वीरगाथाकाल
  • 90.’हिंदी के मुसलमान कवि’ नामक पुस्तक के लेखक है~~ गंगा प्रसाद सिंह

  • 91.हिंदी साहित्य का कौनसा इतिहास ग्रंथ एक पुस्तक के रूप में सबसे बड़ा है~~ हिंदी साहित्य का इतिहास (रमाशंकर शुक्ल रसाल)
  • 92.राजस्थानी साहित्य की रूपरेखा के लेखक हैं~~ मोतीलाल मेनारिया
  • 93.हिंदी साहित्य इतिहास में दोहरे नामकरण की प्रवृत्ति का आरंभ किसने किया~~ आचार्य शुक्ल
  • 94.हजारी प्रसाद द्विवेदी का कौनसा ग्रंथ एक व्याख्यान ग्रंथ है~~ हिंदी साहित्य का आदिकाल
  • 95.अपभ्रंश को पुरानी हिंदी माना~~ चंद्रधर शर्मा गुलेरी
  • 96.आचार्य शुक्ल ने आदिकाल के कितने ग्रंथों को प्रामाणिक माना है ~~12
  • 97.’द मॉडर्न वर्नाक्यूलर लिटरेचर ऑफ हिंदुस्तान’ किसके द्वारा रचित है जिसमें केवल हिंदी कवियों का उल्लेख है~~ ग्रियर्सन
  • 98.द मार्डन वर्नाक्यूलर लिटरेचर ऑफ हिंदुस्तान सन 1888 में एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल की पत्रिका के रूप में प्रकाशित हुआ
  • 99.हिंदी साहित्य के इतिहास में काल विभाजन का सर्वप्रथम प्रयास किया~~ग्रियर्सन
  • 100.’तज़किरा-ई-शुअराई हिंदी’ किसके द्वारा रचित इतिहास ग्रंथ है~~ मौलवी करीमुद्दीन

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