यह ब्लॉग हिन्दी साहित्य व हिन्दी व्याकरण से संबंधित कॉलेज, यूनिवर्सिटी के साथ साथ अन्य सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए लिखा जा रहा है। ब्लॉग लिखने वाले लेखक अपने विषय के अनुभवी शिक्षक हैं।
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01 दिसंबर 2020
कबीर के विषय में प्रसिद्ध कथन :
एक नाम की रचनाएं, विधा और लेखक/कवि
22 नवंबर 2020
उतरमध्य काल - रीतिकाल
1700-1900 वि. आचार्य शुक्ल के अनुसार
26 सितंबर 2020
हिन्दी साहित्य के परीक्षोपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य जो प्रतियोगी परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी हैं---–-
- 1.आचार्य शुक्ल ने आदिकाल में देशभाषा काव्य में कितनी पुस्तकों की संख्या मानी है~~8
- 2.” जनता की चित्तवृत्ति का संचित प्रतिबिंब ही साहित्य हैं “यह माना है~~ शुक्ल
- 3.” भाषा सर्वेक्षण “के रचयिता है~~ जॉर्ज ग्रियर्सन
- 4. पृथ्वीराज रासो कितने प्रकार के छंदों में लिखा गया है~~68
- 5. उपदेश रसायन रास के रचयिता है~~ जिनदत्त सूरी
- 6.पृथ्वीराज रासो काव्य किस कोटि का है~~वीरगाथा महाकाव्य
- 7.”हिंदी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास ” ग्रंथ के लेखक है~~ रामकुमार वर्मा
- 8.इतिहास लेखन की सबसे विकसित पद्धति है ~~विधेयवादी पद्धति
- 9. विद्यापति ने कीर्तिलता को किस संवाद रूप में लिखा है ~~भृंग-भृंगी
- 10.” राठौड़ा री ख्यात” के रचयिता है ~~दयालदास
- 11. नाथों में “रसायनी” कौन थे ~~नागार्जुन
- 12. कविराज श्यामलदास तथा काशी प्रसाद जायसवाल ने रासो की उत्पत्ति मानी है~~ रहस्य से
- 13. “आध्यात्मिक रंग के चश्मे आजकल बहुत सस्ते हो गए हैं उन्हें चढ़ाकर कुछ लोगों ने गीतगोविंद के पद्यों को आध्यात्मिक संकेत बताया है वैसे ही विद्यापति के पद्यों को भी”- पंक्ति है ~~आचार्य शुक्ल
- 14.काफिर बोध, पंचअग्नि, दयाबोध,अष्ट चक्र व रसराह ग्रंथ है ~~गोरखनाथ
- 15. कयमास वध किस रचना का खंड है~~ पृथ्वीराज रासो
- 16. उक्ति व्यक्ति प्रकरण के रचयिता है~~ दामोदर शर्मा
- 17. “मनहुं कला ससीभान कला सोलह सो बनिय “- पंक्ति है~~ चंदबरदाई
- 18. “राउलबेल”श्रृंगार परक चंपू काव्य के रचयिता है ~~रोडा कवि
- 19. अपभ्रंश भाषा का प्रथम कवि माना जाता है ~~स्वयंभू
- 20. स्वयं को ‘अभिमान मेरु’ कहा करते थे~~ पुष्पदंत
- 21. आदिकाल को संधिकाल एवं चारण काल किसने कहा ~~रामकुमार वर्मा
- 22. बौद्ध सिद्धों के पदों और दोहों को ‘ बौद्धगान ओ दोहा’ नाम से बांग्ला भाषा मे प्रकाशित किया~~ पंडित हरप्रसाद शास्त्री
- 23. किरान- उस- सादेन रचना है ~~अमीर खुसरो
- 24. ‘पुरुष परीक्षा’ किसकी संस्कृत में रचित रचना है~~ विद्यापति
- 25. रिठेमणि चरिउ के रचयिता है~~ स्वयंभू
- 26. कीर्तिलता की भाषा है ~~अवहट्ट
- 27.भू- परिक्रमा के रचयिता है ~~विद्यापति
- 28. जयमयंक जस चंद्रिका के रचयिता है~~ मधुकर कवि
- 29. इयाश्रय काव्य की रचना की है~~ हेमचंद्र
- 30. ‘कुमारपाल प्रतिबोध’ गद्य पद्य में प्राकृत काव्य लिखा है~~ सोमप्रभ सुरि
- 31. गोरखनाथ में किसके योग का सहारा लेकर ‘हठयोग’ का प्रवर्तन किया~~ पतंजलि
- 32. ‘रत्नाकर जोपम कथा’ किस संप्रदाय का मानक ग्रंथ है~~ सिद्धों का
- 33.” जिमि लोण बिलिज्जई पाणी एहि तिमि धरणी लई चित्त” कथन है ~~कणहप्पा
- 34. “गंगा जऊना माझे बहई रे नाइ”है- उक्ति है~~ डोम्भीपा
- 35. “काआ तरुवर पंच बिड़ाल” उक्ति है~~ लुइपा
- 36. सिद्धों में सबसे पुराने माने जाते हैं~~ सरहपा
- 37. अपभ्रंश नाम पहले-पहल किस के शिलालेख में मिलता है~~ वल्लभी राजा धारसेन द्वितीय
- 38. “उस समय जैसे ‘गाथा’ या ‘गाहा’ कहने से प्राकृत का बोध होता था वैसे ही दोहा या दूहा कहने से अपभ्रंश का” कथन के लेखक है~~ रामचंद्र शुक्ल
- 39. ‘देशी नाममाला’ किसकी रचना है~~ हेमचंद्र
- 40. हजारी प्रसाद द्विवेदी, विश्वनाथ प्रसाद मिश्र तथा चंद्रबली पांडेय ने रासो की उत्पत्ति मानी है~~ रासक
- 41. हरप्रसाद शास्त्री ने रासो की उत्पत्ति मानी है~~ राजयश
- 42.आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने रासो की उत्पत्ति मानी है ~~रसायण
- 43. पृथ्वीराज रासो की रचना विधान में सर्वाधिक विवादास्पद पक्ष है~~ ऐतिहासिकता
- 44. ‘कन कंड चरिउ’ के रचयिता है~~ कनकामर मुनि
- 45.’प्राकृत प्रकाश’ के रचयिता ~~वररुचि
- 46. ढोला मारु रा दुहा के रचयिता~~ कुशललाभ
- 47. सबसे पहले बारहमासा वर्णन किस रचना में मिलता है ~~बीसलदेव रासो
- 48. आदिकाल को अपभ्रंश काल कहा ~~धीरेंद्र वर्मा
- 49. बारह बरीस लौ कूकर जीवे, और तेरह लौ जिये सियार।
- बरिस अठारह छत्री जीवे, आगे जीवन को धिक्कार।। उक्त पंक्ति है~~जगनिक
- 50. आदिकाल को ‘बीजवपन काल’ कहा है~~महावीर प्रसाद द्विवेदी
- 51. दोहाकोश किसकी रचना है ~~सरहपा
- 52. मैथिल कोकिल कहे जाते हैं ~~विद्यापति
- 53.रणमल छंद की रचना की~~ श्रीधर
- 54. आल्हाखंड नाम से कौन सी रचना प्रसिद्ध है~~ परमाल रासो
- 55. “पद्मावती समय” किस रचना का खंड है~~ पृथ्वीराज रासो
- 56. राजमती और बीसलदेव की कथा किस ग्रंथ में है~~ बीसलदेव रासो
- 57.वर्ण रत्नाकर ग्रंथ के रचयिता है~~ ज्योतिरीश्वर
- 58. नाथ- संप्रदाय के रचयिता है~~ हजारी प्रसाद द्विवेदी
- 59. शिलांकित चंपू गेय काव्य रचना है~ राउलबेल
- 60. दो सुखने, खलिकबारी आदि रचनाएं हैं~ अमीर खुसरो
- 61. प्राण-संकली,सबदी, नरवैबोध, आत्मबोध और पंचमात्रा रचनाएं हैं~~ गोरखनाथ
- 62.गोरखनाथ की रचनाओं को ‘गोरखबानी’ नाम से संपादित किया ~~पीतांबर दत्त बड़थ्वाल
- 63.”पुस्तक जल्हण हत्थ दै, चलि गज़्ज़न नृज काज” पंक्ति है~ जल्हण
- 64. ‘चन्द हिंदी के प्रथम महाकवि माने जाते हैं और इनका पृथ्वीराज रासो हिंदी का प्रथम महाकाव्य है’ कथन के लेखक है~~ आचार्य शुक्ल
- 65.’पृथ्वीराज रासो’ को डॉक्टर श्यामसुंदर दास, मोहनलाल विष्णु लाल पंड्या, मिश्र बंधुओं एवं कर्नल टॉड मानते हैं~~ प्रामाणिक
- 66.हजारी प्रसाद द्विवेदी, मुनि जिन विजय, सुनीति कुमार चटर्जी आदि ‘पृथ्वीराज रासो’ को मानते हैं~~ अर्धप्रमाणिक
- 67.पृथ्वीराज रासो में कितने सर्ग या समय है~~69
- 68.”बज़्ज़िय घोर निसान रान चौहान चहुँ दिसि” पंक्ति है~~ चंदबरदई
- 69. संदेश रासक किस प्रकार का काव्य है~~ खंडकाव्य
- 70. पृथ्वीराज रासो को पूरा किया था~~ जल्हण ने
- 71.’परमात्म-प्रकाश’ और ‘योगसार’ किसकी रचना है~~ जोइंदु
- 72. पाहुड़दोहा के रचयिता है~~ मुनि रामसिंह
- 73. सरहपाद,सरोजवज्र व राहुलभद्र आदि नामों से कौन जाना जाता है~`सरहपा
- 74.अक्षरद्विकोपदेश,डोम्बिगीतिका व योगचार्य किसकी रचनाएं हैं~~डोम्बिपा
- 75. ‘श्रावकाचार’ व दब्ब-सहाव-पयास, लघुनयचक्र और दर्शनसार ग्रन्थ है~~देवसेन
- 76. भरतेश्वर-बाहुबली रास खंड काव्य ग्रंथ लिखा~~ शालिभद्र सूरी
- 77. ‘स्थूलीभद्र रास’ किसकी रचना है~~ जिनधर्म सुरि
- 78. रेवंतगिरी रास रचना है ~~विजयसेन सुरि
- 79. ‘नेमिनाथ रास’ नामक ग्रंथ की 58 छंदों में रचना की~~सुमतिगणि
- 80. नाथ संप्रदाय को ‘अवधूत संप्रदाय’, ‘योग संप्रदाय’ कहा है~~ हजारी प्रसाद द्विवेदी
- 81. डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा किस रचना में हिंदी साहित्य को अखिल भारतीय साहित्य से सम्बद्ध करने का प्रयास हुआ है~~ हिंदी साहित्य की भूमिका
- 82.’आधुनिक हिंदी साहित्य का विकास’ किसके द्वारा लिखित है~~ श्री कृष्णलाल
- 83.’हिंदी पुस्तक साहित्य’ को आधुनिक साहित्य संपत्ति का बीजक किसने कहा है~~ डॉ• माता प्रसाद गुप्त
- 84.’हिंदी साहित्य और संवेदना का विकास’ लिखा गया~~ डॉ. रामस्वरूप चतुर्वेदी
- 85.’हिंदी साहित्य का वैज्ञानिक इतिहास’ में संपूर्ण इतिहास को डॉ. गणपति चंद्र गुप्त ने कितने काल खंडों में विभाजित किया है~~ आदिकाल, मध्यकाल और आधुनिक काल
- 86.हिंदी साहित्य का सर्वाधिक व्यवस्थित और प्रथम इतिहास है~~ हिंदी साहित्य का इतिहास(शुक्ल)
- 87.अपभ्रंश साहित्य को हिंदी साहित्य से अलग मानकर उसे पूर्व पीठिका के रूप में किसने प्रस्तुत किया ~~आचार्य शुक्ल
- 88.आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने काल विभाजन का प्रधान आधार क्या माना~~ जनता की चित्तवृत्ति के परिवर्तन को
- 89.शुक्ल कृत हिंदी साहित्य का इतिहास में आदिकाल का नाम जो सर्वाधिक विवादास्पद रहा ~~वीरगाथाकाल
- 90.’हिंदी के मुसलमान कवि’ नामक पुस्तक के लेखक है~~ गंगा प्रसाद सिंह
- 91.हिंदी साहित्य का कौनसा इतिहास ग्रंथ एक पुस्तक के रूप में सबसे बड़ा है~~ हिंदी साहित्य का इतिहास (रमाशंकर शुक्ल रसाल)
- 92.राजस्थानी साहित्य की रूपरेखा के लेखक हैं~~ मोतीलाल मेनारिया
- 93.हिंदी साहित्य इतिहास में दोहरे नामकरण की प्रवृत्ति का आरंभ किसने किया~~ आचार्य शुक्ल
- 94.हजारी प्रसाद द्विवेदी का कौनसा ग्रंथ एक व्याख्यान ग्रंथ है~~ हिंदी साहित्य का आदिकाल
- 95.अपभ्रंश को पुरानी हिंदी माना~~ चंद्रधर शर्मा गुलेरी
- 96.आचार्य शुक्ल ने आदिकाल के कितने ग्रंथों को प्रामाणिक माना है ~~12
- 97.’द मॉडर्न वर्नाक्यूलर लिटरेचर ऑफ हिंदुस्तान’ किसके द्वारा रचित है जिसमें केवल हिंदी कवियों का उल्लेख है~~ ग्रियर्सन
- 98.द मार्डन वर्नाक्यूलर लिटरेचर ऑफ हिंदुस्तान सन 1888 में एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल की पत्रिका के रूप में प्रकाशित हुआ
- 99.हिंदी साहित्य के इतिहास में काल विभाजन का सर्वप्रथम प्रयास किया~~ग्रियर्सन
- 100.’तज़किरा-ई-शुअराई हिंदी’ किसके द्वारा रचित इतिहास ग्रंथ है~~ मौलवी करीमुद्दीन
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हिन्दी साहित्य में सर्वप्रथम कौन , क्या, कैसे ????
हिन्दी साहित्य में सर्वप्रथम योगदान या उपलब्धि संबंधी तथ्यों का काफी महत्व है। इस तरह के प्रश्न स्कूल, कॉलेज या प्रतियोगी परीक्षाओं मे अक्सर पूछे जाते रहे हैं ------
- 1. अपभ्रंश के प्रथम महाकवि - स्वयंभू
- 2.अपभ्रंश का प्रथम कड़वक बद्ध- पउम चरित्र - स्वयंभू
- 3.अपभ्रंश के प्रथम ऐतिहासिक वैयाकरण - हेमचंद्र
- 4.हिंदी के प्रथम कवि - सरहपा
- 5.हिंदी में दोहा चौपाई का सर्वप्रथम प्रयोग- सरहपा
- 6.हिंदी की प्रथम रचना- श्रावकाचार देवसेन कृत
- 7. हिंदी साहित्य की प्रथम रचना - पृथ्वीराज रासो चंद्र बरदाई
- 8. हिंदी साहित्य का प्रथम महाकाव्य- पृथ्वीराज रासो
- 9. हिंदी काव्य में प्रथम बारहमासा वर्णन - बीसलदेव रासो
- 10. किसी भारतीय भाषा में रचित इस्लाम धर्मावलंबी कवि की प्रथम रचना- संदेश रासक (अब्दुल रहमान)
- 11. अवहट्ठ का सर्वप्रथम प्रयोग- विद्यापति ने कीर्तिलता में
- 12. हिंदी के सर्वप्रथम गीतकार - विद्यापति
- 13. हिंदी में सर्वप्रथम मुकरियों की शुरुआत - अमीर खुसरो
- 14. भक्ति के प्रवर्तक - रामानुजाचार्य
- 15. हिंदी के प्रथम सूफी कवि - असायत
- 16. सूफी प्रेमाख्यान का प्रथम काव्य- हंसावली असायत
- 17. हिंदी का प्रथम बड़ा महाकाव्य - हंसावली( असायत )
- 18.हिंदी का प्रथम वक्रोति कथात्मक महाकाव्य- पद्मावत
- 19. हिंदी की आदि कवियत्री - मीराबाई
- 20. कृष्ण भक्ति काव्य का सबसे प्रसिद्ध काव्य- सूरसागर (सूरदास)
- 21. राम भक्ति का सबसे प्रसिद्ध काव्य- रामचरितमानस (तुलसीदास )
- 22.भक्तिकाल को काव्य का स्वर्ण युग घोषित करने वाला प्रथम व्यक्ति -जॉर्ज ग्रियर्सन
- 23. सर्वप्रथम सतसई परंपरा का आरंभ - तुलसी सतसई
- ( अधिकांश कृपाराम की हित तरंगिणी को मानते हैं)
- 24. रीति काव्य का सर्वप्रथम ग्रंथ -हित तरंगिणी -कृपाराम
- 25. खड़ी बोली में लिखित सर्वप्रथम काव्य ग्रंथ -श्रीधर पाठक द्वारा अनुवादित( हरमिट)-एकांतवासी योगी
- 26. खड़ी बोली के प्रथम स्वच्छंदतावादी कवि- श्रीधर पाठक
- 27. खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य -प्रियप्रवास- हरिऔंध
- 28. गीतिकाव्य शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग -लोचन प्रसाद पांडेय ने कुसुमनमाला की भूमिका में
- 29. छायावाद की प्रथम कृति -झरना 1918 प्रसाद
- 30. शुक्लानुसार छायावाद का प्रथम प्रतिनिधि कवि- पंत
- 31. मुक्तछंद का प्रथम प्रयोगकर्ता -निराला -जूही की कली में
- 32.निराला की प्रथम कविता -जूही की कली -1916
- 33. प्रयोगवाद शब्द का प्रथम प्रयोग -नंददुलारे वाजपेई
- 34.नई कविता नाम दिया -अज्ञेय ने
- 35. अज्ञेय की प्रथम काव्य कृति -भग्न दूत 1933
- 36. प्रेमचंद का प्रथम उपन्यास- प्रेमा अर्थात दो सखियों का विवाह 1907 हम खुर्मा व हम सवाब का हिंदी रुपांतर
- 37. हिंदी का प्रथम उपन्यास -परीक्षा गुरु लाला श्रीनिवास दास कृत
- 38. प्रेमचंद का मूल रूप से हिंदी में लिखित प्रथम उपन्यास -कायाकल्प 1926
- 39 जैनेंद्र का प्रथम उपन्यास-परख 1929
- 40. इलाचंद्र जोशी का प्रथम उपन्यास -घृणामयी 1929
- 41. भगवती चरण वर्मा का प्रथम उपन्यास- चित्रलेखा 1934
- 42. अज्ञेय का प्रथम उपन्यास- शेखर एक जीवनी 1941
- 43. रेणु का प्रथम उपन्यास -मैला अंचल 1954
- 44.निर्मल वर्मा का प्रथम उपन्यास -वे दिन 1964
- 45. हिंदी की प्रथम मौलिक कहानी -इंदुमती - किशोरीलाल
- 46.हिंदी की प्रथम कहानी लेखिका -बंग महिला( राजेंद्र बाला घोष)
- कहानी -दुलाई वाली
- 47. प्रसाद की प्रथम कहानी -ग्राम 1911(इंदु पत्रिका में published)
- 48 प्रेमचंद की प्रथम कहानी- पंच परमेश्वर 1916
- 49.निर्मल वर्मा का प्रथम कहानी संग्रह - परिदें 1960
- 50. कमलेश्वर का प्रथम कहानी संग्रह -राजा निरबंसिया 1957
- 51. हिंदी का प्रथम मौलिक नाटक - (भारतेंदु ने माना) नहुष -गोपाल चंद्र
- √√आनंद रघुनन्दन -प्राणचंद चौहान
- 52. हिंदी का प्रथम अभिनीत नाटक -जानकी मंगल (शीतला प्रसाद खत्री)
- 53. प्रसाद का प्रथम ऐतिहासिक नाटक -राज्यश्री 1915
- 54. हिंदी का प्रथम एकांकी -एक घूंट (प्रसाद)
- 55. आचार्य रामचंद्र शुक्ल की पहली सैद्धांतिक आलोचना कृति -काव्य में रहस्यवाद
- 56. रस विवेचन को पहली बार मनोवैज्ञानिक आधार प्रदान किया -रामचंद्र शुक्ल ने
- 57. हिंदी में साधारणीकरण के संबंध में पहला चिंतन- रामचंद्र शुक्ल
- 58.साधारणीकरण का प्रथम प्रयोगकर्ता -भट्टनायक
- 59. हिंदी में प्रथम आत्मकथा -अर्द्धकथानक 1641 -बनारसीदास जैन
- 60. हिंदी में प्रथम जीवनी -भक्तमाल -1585 नाभादास
- (प्रथम मौलिक जीवनी लेखक -कार्तिक प्रसाद खत्री -
- मीराबाई का जीवन चरित्र -1883
- अहल्या बाई का जीवन चरित्र-1889)
- 61. हिंदी में प्रथम संस्मरण -हरिऔंध का संस्मरण (बालमुकुंद गुप्त)
- 62. हिंदी में प्रथम रेखाचित्र -पदम पराग (1929 )पदम सिंह शर्मा
- 63. हिंदी में प्रथम यात्रा वृतांत- लंदन यात्रा 1883 श्रीमती हर देवी
- 64. हिंदी में प्रथम रिपोर्ताज -लक्ष्मीपुरा -1938 शिवदान सिंह चौहान
- 65. हिंदी गद्य काव्य की प्रथम रचना- साधना (राय कृष्णदास)
- 69. हिंदी साहित्य इतिहास का प्रथम व्यवस्थित ग्रंथ- हिंदी साहित्य का इतिहास( रामचंद्र शुक्ल)
- 70. परंपरा की दृष्टि से रचित हिंदी साहित्य इतिहास का प्रथम ग्रंथ -हिंदी साहित्य की भूमिका (हजारी प्रसाद द्विवेदी)
- 71. साहित्य इतिहास का प्रथम मार्क्सवादी ग्रंथ कार- रामविलास शर्मा
- 72. खड़ी बोली पद्य का प्रथम प्रयोगकर्ता अमीर- खुसरो
- 73. खड़ी बोली की प्रथम गद्य रचना -चंद छंद बरनन की महिमा गंग कवि
- 74. खड़ी बोली में साहित्य स्वरूप का सर्वप्रथम प्रयोग किया- रामप्रसाद निरंजनी ने योग- भाषा वशिष्ठ में
- 75.किसी भारतीय द्वारा देशी भाषा में प्रकाशित प्रथम पत्र- संवाद कौमुदी 1821 सं.राजा राममोहन राय
- 76. प्रथम हिंदी पत्र -उदंत मार्तंड 30 मई 1826
- 77. सर्वप्रथम हिंदी दैनिक पत्र- समाचार सुधा वर्षण 1854
- 78. हिंदी की प्रथम लघु पत्रिका -नए पत्ते -लक्ष्मीकांत वर्मा
- 79. हिंदी में प्रकाशित प्रथम ग्रंथावली -भारतेंदु ग्रंथावली
- 80. हिंदी के लिए प्रथम साहित्य अकादमी पुरस्कार- हिम तरंगिनी माखनलाल चतुर्वेदी 1955
- 81. ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रथम हिंदी साहित्यकार पंत - 1968 चिदम्बरा
- 82. ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रथम हिंदी महिला साहित्यकार -महादेवी वर्मा यामा -1982
- 83. प्रथम व्यास सम्मान -भारत के भाषा परिवार और हिंदी( डॉक्टर रामविलास शर्मा 1991)
- 84. प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन -नागपुर -1975
- 85. एम.ए .हिंदी का सर्वप्रथम शिक्षण प्रारंभ हुआ- काशी हिंदू विश्वविद्यालय में 1921
- 86. काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रथम हिंदी विभागाध्यक्ष -श्यामसुंदर दास
- 87. साहित्य अकादमी का प्रथम अध्यक्ष- पंडित जवाहरलाल नेहरु
- 88. हिंदी साहित्य परिषद का प्रथम अध्यक्ष -पुरुषोत्तम दास टंडन
- 89. संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी में भाषण देने वाला प्रथम व्यक्ति- अटल बिहारी वाजपेई 1977
- 90. हिंदी भाषा का प्रथम वैज्ञानिक इतिहास -हिंदी भाषा का इतिहास 1933- धीरेंद्र वर्मा
- 91-हिन्दी का पहला स्वतन्त्र मौलिक निबंध -राजा भोज का सपना
- (राजा शिवप्रसाद सितारे हिन्द)
- 92- प्राचीनतम गद्य - पद्य(चम्पू )काव्य -राउरवेळ -रोड़ा कवि
- 93.ब्रजभाषा गद्य की प्रथम रचना -शृंगार रस मंडन -गोंसाई विट्ठलनाथ
- 94.आधुनिक खड़ी बोली हिंदी गद्य का जनक -भारतेन्दु
- 95--हिन्दी की पहली वैज्ञानिक कहानी -चन्द्र लोक की यात्रा
- 96-फ्लेश बैक पद्धति आधारित प्रथम कहानी -उसने कहा था
- 97.नवगीत परम्परा के सूत्रधार-अज्ञेय
- आधार प्रवर्तक -राजेंद्र प्रसाद सिंह
- 98 .हिन्दी आलोचना के प्रवर्तक - भारतेंदु
- 99.हिन्दी के प्रथम लक्षण ग्रंथकार -केशवदास
- 100.हिन्दी में रामभक्ति साहित्य सम्बन्धी प्रथम काव्य रचना -रामरक्षा स्त्रोत (रामानंद)
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21 सितंबर 2020
02 सितंबर 2020
शब्द - शक्ति
08 अगस्त 2020
सन्धि विच्छेद
ऋक् +वेद = ऋग्वेद दिक्+गज= दिग्गज
दिक्+अंबर=दिगंबर वाक्+ईश=वागीश
अच्+अन्त=अजन्त अच्+आदि=अजादि
शट्+अंग= षडंग शट्+आनन=षडानन षट्=दर्शन= षड्दर्शन
⇢
अप्+द=अब्द अप्+ज=अब्ज
⇢
जगत्+ईश=जगदीश उत्+गम=उद्गम
तत्+भव=तद्भव उत्+आहरण =उदाहरण
सन्धि
विच्छेद
परिभाषा - दो या दो से अधिक वर्गो या ध्वनियों के मेल को सन्धि कहते हैं । सन्धि के अंतर्गत पहले शब्द के प्रथम अक्षर और अंतिम शब्द के पहले अक्षर का मेल होता है । और इन दोनों शब्दों के मेल से एक नया शब्द बनता है । कहीं कहीं दोनों ही शब्दों का रूप बदल जाता है तो कहीं कहीं दोनों की जगह तीसरा वर्ण आ जाता है।
सन्धि के लिए ध्वनियों के मेल से परिवर्तन
होना आवश्यक है । यदि दो ध्वनियों के पास पास आने पर भी उनमें परिवर्तन ना हो तो उसे सन्धि नहीं संयोग कहा जाता है
। जैसे-
नमः + ते = नमस्ते में सन्धि है वहीं
अंतः +पुर = अंतःपुर में संधि नहीं बल्कि संयोग है ।
सन्धि के भेद -- सन्धि के तीन भेद
माने गए हैं --( 1 ) स्वर सन्धि (2) व्यंजन सन्धि (3) विसर्ग सन्धि-
|
स्वर सन्धि |
दो स्वरों के मेल से
उत्पन्न होने वाले विकार को स्वर सन्धि कहते हैं । स्वर सन्धि के भी
पाँच भेद माने गए हैं -
- गुण सन्धि
- यण सन्धि
- अयादि
- वृद्धि सन्धि
V.
विसर्ग सन्धि
|
अयादि सन्धि |
यदि ए, ऐ, ओ, औ के बाद कोई भिन्न स्वर आए तो -
ए का अय,
ऐ का आय,
ओ का अव,
औ का आव हो जाता है। जैसे –
चे + अन = चयन ने + अन = नयन
पौ + अन = पावन नै
+ अक = नायक
गै + अक = गायक पो + अन = पवन
श्रो + अन = श्रवण ( न का ण हो जाता है )
|
वृद्धि सन्धि
|
|
|
यदि अ या आ के बाद
ए या ऐ आए तो दोनों के स्थान पर ऐ हो
जाएगा तथा
ओ या औ आये तो
दोनों के स्थान पर ओ हो
जाएगा । जैसे-
अ+ए = ऐ एक + एक = एकैक
अ+ऐ = ऐ
नव + ऐधर्य = नवैधर्य
आ+ए = ऐ सदा + एव = सदैव
आ+ऐ = ऐ महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य
अ+ओ = औ परम + ओजस्वी = परमौजस्वी
अ+औ = औ परम + औषध
= परमौषध
आ+ओ = औ महा + ओजस्वी = महौजस्वी
आ+औ = औ महा +
औषध = महौषध
|
यण सन्धि |
यदि इ ई ,उ,ऊ, तथा ऋ के बाद कोई भिन्न स्वर आये तो ई, ई का य,
उ, ऊ का व और
ऋ का र हो जाता है। जैसे-
इ+अ = य
यदि + अपि = यद्यपि
इ+आ = या
अति + आवश्यक = अत्यावश्यक
इ+उ = यु
अति + उत्तम = अत्युत्तम
इ+ऊ = यू
अति + ऊष्म = अत्यूष्म
इ+ए=
ये प्रति + एक = प्रत्येक
इ+ऐ = यै
अति + ऐश्वर्य = अत्यैश्वर्य
ई+अ = य
देवी + अर्पण = दैव्यर्पण
ई+अ = या
सखी + आगमन = सख्यागमन
ई+उ = यु नारी +
उचित = नार्युचित
ई+ऊ = यू नदी + ऊर्मि = नद्यूर्मि
ई+ऐ = यै
सखी + ऐक्य = सख्यैक्य
इ+ओ = यो
अति + ओज = अत्योज
इ+औ = यौ
अति + औचित्य = अत्यौचित्य
ई+औ = यौ
वाणी + औचित्य= वाण्यौचित्य
उ+अ = व
अनु + अय = अन्वय
उ+आ = वा मधु +
आलय = मध्वालय
उ+इ = वि
धातु + इक = धात्विक
उ+ई = वी
अनु + ईक्षक = अन्वीक्षक
उ+ए = वे
अनु + एषण = अन्वेषण
उ+ओ = वो गुरु + ओदन = गुर्वोदन
उ+औ = वौ गुरु +
औदार्य = गुर्वौदार्य
ऊ+अ = व
वधू + अर्थ = वध्वर्थ
ऊ+आ = वा
वधू + आगमन = वध्वागमन
ऊ+ऐ = वै
वधू + ऐश्वर्य = वध्वैश्वर्य
ऋ+आ = र
पितृ + आदेश = पित्रादेश
|
दीर्घ सन्धि |
ह्रस्व या दीर्घ अ,इ,उ,ऋ,लृ के बाद क्रमश: ह्रस्व या दीर्घ अ,इ,उ,ऋ,लृ आ जाए तो दोनों को मिलाकार दीर्घ आ, ई ,ऊ हो जाता है। जैसे-
अ+अ = आ
राम+अयन = रामायण परम+अर्थ=
परमार्थ
गीत+अंजली= गीतांजली शत+अब्दी=
शताब्दी
दीप+अवली= दीपावली पर+अधीन=
पराधीन
अ+आ = आ
शिव+आलय = शिवालय धर्म+आत्मा
= धर्मात्मा
दीर्घ+आयु = दीर्घायु शरण+आगत
= शरणागत
लोक+आयुक्त = लोकायुक्त द्रौण+आचार्य
= द्रौणाचार्य
आ+अ = आ
|
विद्या + अर्थी विद्य्
+ आ + अ + र्थी विद्य्
+ आ + र्थी
= विद्यार्थी |
तथा+अपि = तथापि सुधा
+ अंशु = सुधांशु
कविता+अवली = कवितावली वर्षा+अंत = वर्षांत
आ+आ= आ
विद्या+आलय = विद्यालय ( वि+द्+य+आ+आलय )
महा+आशय= महाशय प्रेक्षा+आगार=
प्रेक्षागार
वार्ता+आलाप= वार्तालाप
इ+इ=ई
अभि+इष्ट= अभीष्ट ( अ+भ्=इ+इ+ष्ट)
मुनि+इन्द्र= मुनीन्द्र रवि+इन्द्र=
रवीन्द्र
अति+इत = अतीत अधि+ईक्षण=
अधीक्षण
ई+इ = ई
योगी+इन्द्र=
योगीन्द्र सुधी+इन्द्र= सुधीन्द्र
मही+इन्द्र=
महीन्द्र लक्ष्मी+इच्छा= लक्ष्मीच्छा
इ + ई = ई
अभि+ईप्सा=
अभीप्सा परि+ईक्षा= परीक्षा
कवि+ईश्वर=
कवीश्वर गिरि+ईश= गिरीश
ई + ई = ई
मही+ईश=
महीश रजनी+ईश= रजनीश
नदी+ईश=
नदीश नारी+ईश्वर= नारीश्वर
उ+उ = ऊ
गुरु+उपदेश=
गुरूपदेश भानु+उदय= भानूदय
अनु+उदित
= अनूदित सु+उक्ति= सूक्ति
उ+ऊ = ऊ
लघु+उर्मि=
लघूर्मि धातु+ऊष्मा= धातूष्मा
ऊ+उ = उ
वधू+उत्सव=
वधूत्सव चमू+उत्साह= चमूत्साह
वधू+उक्ति=
वधूक्ति भू+उपरि = भूपरि
ऊ+ऊ = ऊ
सरयू+ऊर्मि=
सरयूर्मि भू+ऊर्ध्व= भूर्ध्व
ऋ+ऋ = ऋ
मातृ+ऋण=
मातृण पितृ+ऋण= पितृण
|
विसर्ग सन्धि – |
विसर्ग (:) के बाद
स्वर या व्यंजन आने पर विसर्ग में जो परिवर्तन होता है , उसे विसर्ग सन्धि कहते हैं ।
विसर्ग सन्धि के कुछ नियम होते हैं जो इस प्रकार हैं –
नियम 1- अ:+अ = ओ
नियम .2- अ: + किसी वर्ग का तीसरा, चौथा,
पाँचवाँ वर्ण / य,र,ल,व,ह
= अ: के स्थान पर ‘ओ’
मन:+ज= मनोज तप:+बल= तपोबल
मन:+अभिलाषा=मनोभिलाषा अध:+गति = अधोगति
नियम 2- विसर्ग का र में
परिवर्तित हो जाना—
अ या आ से भिन्न स्वर ( : )
+
कोई स्वर/ किसी वर्ग का तीसरा, चौथा,
पाँचवाँ वर्ण/य,व,र,ल,ह
=
विसर्ग(:) के स्थान पर र्
आशी:+वाद = आशीर्वाद नि:+आशा
= निराशा
दु:+उपयोग = दुरुपयोग नि:+मल
= निर्मल
नियम 3- हृस्व स्वर(:) +र =
विसर्ग का लोप होना तथा विसर्ग से पूर्व हृस्व का दीर्घ स्वर में बदलना –
नि: + रोग = नीरोग नि: +
रज = नीरज
नि: + रस = नीरस नि: + रव
= नीरव
नियम-4- विसर्ग का श् में
बदलना-स्वर (:)
स्वर (:) + च,/छ,/श् = (:)
के स्थान श्
दु: + शासन = दुश्शासन नि: +
चय= निश्चय
यश: + शरीर = यश्शरीर आ: +
चर्य= आश्चर्य
नियम- 5 स्वर
( : ) + त/स = ( : ) के स्थान पर स्
अ:/आ: + क/प + ( :
) के स्टैन पर स्
( इस नियम के अंतर्गत आने
वाले शब्द नम:, तीर:, भा:, पुर:, श्रेय:, दु: आदि शब्दों से शुरू होते हैं। )
नम:+कार= नमस्कार नि:तेज
= निस्तेज
दु:+साहस = दुस्साहस भा:+कर=
भास्कर
नियम- 6
इ:/उ: + क,ख,त,थ,प,फ = (:) के स्थान पर ष् -
दु:+कर= दुष्कर चतु:+कोण= चतुष्कोण
नि:+फल= निष्फल बहि:+कृत= बहिष्कृत
नियम - 7 अ ( : ) + क/प = विसर्ग में कोई परिवर्तन नहीं
होता है।
प्रात: + काल= प्रातःकाल अंत:+करण= अन्तःकरण
नियम - 8 अ: + इ/ए = विसर्ग का लोप -
अत:+एव= अतएव यश:+इच्छा = यशइच्छा
हिन्दी की कुछ संधियाँ –
किसी= किस+ही इसी= इस+ही
यही= यह+ही जैसा=
जो+ऐसा
यहीं= यह+ही मुझी=
मुझ+ही
कभी= कब+ही उसी=
उस+ही
ऐसे शब्द जिनमें कोई शब्द
संधि नहीं है फिर भी शब्द संधि जैसे लगते है-
सत्य +
नाश = सत्यनाश विश्व + मित्र = विश्वामित्र
दिवा + रात्रि
= दिवरात्र रघु + अ = राघव
समुदाय +
इक = सामुदायिक मौसी + एरा = मौसैरा
मूसल +
धार= मूसलाधार बात + ओला = बतोला
दिन +
नाथ= दीनानाथ मनु + अ = मानव
भूगोल +
इक= भौगोलिक साँप + एरा = सपेरा
व्यंजन सन्धि |
स्पर्शत्य - क,ख,ग,घ,ङ
च,छ,ज,झ,ञ
ट,ठ,ड,ढ,ण
त,थ,द,ध,न
प,फ,ब,भ,म
अंतस्थ - य,र,ल,व
ऊष्म - श,ष,स,ह
नियम –
- व्यंजन + व्यंजन
व्यंजन + स्वर
स्वर +
व्यंजन
नियम-1 यदि किसी वर्ग का पहला वर्ण + किसी भी वर्ग का तीसरा या चौथा वर्ण या य,व,र,ल,ह या कोई स्वर आए तो उसी पहले वर्ण के स्थान पर उसी वर्ग का तीसरा वर्ण आ जाएगा। जैसे-
क ⇢ ग
ऋक् +वेद = ऋग्वेद दिक्+गज= दिग्गज
दिक्+अंबर=
दिगंबर वाक्+ईश=
वागीश
च ⇢ ज
अच्+अन्त= अजन्त अच्+आदि= अजादि
ट ⇢ ड
शट्+अंग= षडंग शट्+आनन= षडानन षट्=दर्शन= षड्दर्शन
प⇢ ब
अप्+द= अब्द अप्+ज= अब्ज
त ⇢ द
जगत्+ईश= जगदीश उत्+गम= उद्गम
तत्+भव= तद्भव उत्+आहरण= उदाहरण
नियम-2 यदि किसी वर्ग का पहला वर्ण
+ न, म आये तो
तो उसी पहले वर्ण के स्थान पर उसी वर्ग का पाँचवाँ वर्ण आ जाएगा। जैसे-
वाक्+मय= वाङ्मय शट्+मास= षण्मास
जगत्+नाथ=
जगन्नाथ उत्+माद= उन्माद
सत्+नारी=
सन्नारी तत्+नाम= तन्नाम
नियम-3
त् +
च/छ = च्च/च्छ -
उत्+छेद = उच्छेद
नियम-4 (I) त्/द्
+ श् = च्छ -
(II) कोई भी स्वर + च्छ
–
सत्+शास्त्र
= सच्छास्त्र तत्+शिव= तच्छिव
श्रीमत्+शरच्चंद्र=
श्रीमच्छरचंद्र उत्+श्वास= उच्छवास
स्व+छंद
= स्वच्छन्द आ+छादन=
आच्छादन
पितृ+छाया
= पितृच्छाया अनु+छेद= अनुच्छेद
नियम-5 त् + ह = द्ध
( हिन्दी व्याकरण की कुछ पुस्तकों में त् के स्थान पर द् का प्रयोग किया गया है
जैसे, उत् की
जगह उद्+हार =उद्धार । किन्तु छात्र इससे भ्रमित ना हो क्योंकि त् व द् दोनों का प्रयोग सही माना जाता है । )
उत्+हार
= उद्धार पत्+हति = पद्धति
उत्+हरण
= उद्धरण तत्+हित = तद्धित
नियम-6 यदि म् + क से भ तक कोई भी स्पर्श व्यंजन आ जाए तो म् के
स्थान पर उसी वर्ग का पंचम वर्ण या अनुस्वार आ जाएगा ।
जैसे –
सम्+देह= सन्देह/ संदेह सम्+भव= संभव /सम्भव
वसुम्+धरा= वसुंधरा/वसुन्धरा तीर्थम्+कर= तीर्थंकर
अलम्+कार= अलंकार सम्+जय= संजय
सम्=धि= संधि/सन्धि दम्+ड = दंड/दण्ड
शुभम्+कर= शुभंकर धनम्+जय= धनंजय/धनञ्जय
नियम-7 यदि म् + य,र,ल,व,श,स,ष,ह हो तो म् के स्थान पर अनुस्वार हो जाएगा ।
सम्+वाद = संवाद प्रियम्+वदा = प्रियंवदा
सम्+रक्षक= संरक्षक सम्+विधान= संविधान
सम्+सार= संसार सम्+लग्न= संलग्न
सम्+त्रास= संत्रास सम्+स्मरण= संस्मरण
नियम- 8 यदि द् + क, त, थ,प,स हो तो द् का त हो जाता है –
उद्=साह= उत्साह विपद्+ति= विपत्ति
संसद्+सदस्य= संसत्सदस्य तद्+पुरुष
= तत्पुरुष
संपद्+ति= संपत्ति उद्+तर= उत्तर
नियम- 9 ष + त = ष्ट
ष+थ = ष्ठ
युधि+स्थिर = युधिष्ठिर नि+स्था= निष्ठा
नि+स्नात= निष्णात प्रति+स्थान= प्रतिष्ठान
कष्+त= कष्ट नि+स्थुर= निष्ठुर
नियम-10 यदि सम् + कृत, कृति, कार, करण, कारक आदि का प्रयोग हो तो म् का
अनुस्वार बन जाता है और स आ जाता है , इसी प्रकार यदि परि + कृत, कृति, कार, करण, कारक आदि का प्रयोग हो तो परि के बाद ष् का आगमन हो जाता है -
परि+कार= परिष्कार सम्+कृत= संस्कृत
सम्+कार= संस्कार परि+कृत= परिष्कृत
नियम-11 न
के स्थान पर ण का प्रयोग –
राम+अयन= रामायण प्र + नाम = प्रणाम
शोष् + अन = शोषण परि+मान = परिमाण
कृष्+न = कृष्ण ऋ+न= ऋण
नियम-12 अ,आ के अतिरिक्त कोई अन्य स्वर + स का प्रयोग हो तो स के स्थान पर ष हो जाएगा -
अभि=सेक= अभिषेक नि+सिद्ध= निषिद्ध
वि+सम= विषम उपनि+सद्=
उपनिषद्
सु+समा= सुषमा सु+स्मिता= सुष्मिता
नियम-13 ‘ न् ’ का लुप्तिकरण -
मंत्रिन्+मण्डल= मंत्रिमण्डल युवन्+राज=
युवराज
पक्षिन्+गण= पक्षिगण प्राणिन्+विज्ञान= प्राणिविज्ञान
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