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08 अगस्त 2020

सन्धि विच्छेद


ऋक् +वेद = ऋग्वेद     दिक्+गज= दिग्गज     

दिक्+अंबर=दिगंबर       वाक्+ईश=वागीश

 



अच्+अन्त=अजन्त    अच्+आदि=अजादि

 


    

   शट्+अंग= षडंग            शट्+आनन=षडानन     षट्=दर्शन= षड्दर्शन

 

 ⇢      

अप्+द=अब्द         अप्+ज=अब्ज

 

 ⇢     

जगत्+ईश=जगदीश    उत्+गम=उद्गम

 तत्+भव=तद्भव            उत्+आहरण =उदाहरण




सन्धि विच्छेद

  

 

           परिभाषा -  दो या दो से अधिक वर्गो या ध्वनियों के मेल को सन्धि कहते हैं । सन्धि के अंतर्गत पहले शब्द के प्रथम अक्षर और अंतिम शब्द के पहले अक्षर का मेल होता है । और इन दोनों शब्दों के मेल से एक नया शब्द बनता है ।  कहीं कहीं दोनों ही शब्दों का रूप बदल जाता है तो कहीं कहीं दोनों की जगह तीसरा वर्ण आ जाता है। 

             सन्धि के लिए ध्वनियों के मेल से परिवर्तन होना आवश्यक है । यदि दो ध्वनियों के पास पास आने पर भी उनमें परिवर्तन  ना हो तो उसे सन्धि नहीं संयोग कहा जाता है । जैसे- 

               नमः + ते = नमस्ते में सन्धि है वहीं 

               अंतः +पुर = अंतःपुर में संधि नहीं बल्कि संयोग है ।

  

सन्धि के भेद -- सन्धि के तीन भेद माने गए हैं --( 1 ) स्वर सन्धि (2) व्यंजन सन्धि (3) विसर्ग सन्धि-

 

स्वर सन्धि

 

   दो स्वरों के मेल से उत्पन्न होने वाले विकार को स्वर सन्धि कहते हैं । स्वर सन्धि के भी पाँच भेद माने गए हैं -

  1. गुण सन्धि 
  2. यण सन्धि
  3. अयादि
  4. वृद्धि सन्धि

   V.        विसर्ग सन्धि

 

अयादि सन्धि

   यदि ए,,, औ के बाद कोई भिन्न स्वर आए तो -

 

  ए का अय,

  ऐ का आय,

  ओ का अव,

  औ का आव हो जाता है। जैसे –

      चे + अन = चयन                     ने + अन = नयन 

      पौ + अन = पावन                    नै + अक = नायक

      गै + अक = गायक                    पो + अन = पवन

      श्रो + अ = श्रव ( का हो जाता है )

 

 

वृद्धि सन्धि

 

 

 

 

 

          यदि अ या आ के बाद ए या ऐ आए तो दोनों के स्थान पर हो जाएगा तथा

 ओ या औ आये तो दोनों के स्थान पर हो जाएगा । जैसे-

   अ+ए = ऐ     एक + एक = एकैक

   अ+ऐ = ऐ     नव + ऐधर्य = नवैधर्य

   आ+ए = ऐ    सदा + व =  सदैव

   आ+ऐ = ऐ    महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य

   अ+ओ = औ   परम + जस्वी = परमौजस्वी

   अ+ = औ   परम + औषध = परमौषध

   आ+ओ = औ   महा + जस्वी = महौजस्वी

   आ+औ = औ   महा + औषध = महौषध

यण सन्धि

 

यदि इ ई ,,, तथा के बाद कोई भिन्न स्वर आये तो ई, ई का ,

 उ, ऊ का और

 ऋ का हो जाता है। जैसे-

       इ+अ = य   यदि + अपि = यद्यपि

       इ+आ = या  अति + आवश्यक = अत्यावश्यक

       इ+उ = यु   अति + उत्तम = अत्युत्तम

       इ+ऊ = यू   अति + ऊष्म = अत्यूष्म

       इ+ए=  ये   प्रति + एक = प्रत्येक

       इ+ऐ = यै   अति + ऐश्वर्य = अत्यैश्वर्य

       ई+अ = य   देवी + अर्पण = दैव्यर्पण

       ई+अ = या   सखी + आगमन = सख्यागमन

       ई+उ = यु    नारी + उचित = नार्युचित

       ई+ऊ = यू    नदी + ऊर्मि = नद्यूर्मि

       ई+ऐ = यै    सखी + ऐक्य = सख्यैक्य

       इ+ओ = यो   अति + ओज = अत्योज

       इ+औ = यौ   अति + औचित्य = अत्यौचित्य

       ई+औ = यौ   वाणी + औचित्य= वाण्यौचित्य     

       उ+अ = व    अनु + अय = अन्वय

       उ+आ = वा    मधु + आलय = मध्वालय

       उ+इ = वि     धातु + इक = धात्विक

       उ+ई = वी     अनु + ईक्षक = अन्वीक्षक

       उ+ए = वे      अनु + एषण = अन्वेषण

       उ+ओ = वो     गुरु + ओदन = गुर्वोदन

       उ+औ = वौ     गुरु + औदार्य = गुर्वौदार्य

       ऊ+अ = व      वधू + अर्थ = वध्वर्थ

       ऊ+आ = वा     वधू + आगमन = वध्वागमन  

       ऊ+ऐ = वै      वधू + ऐश्वर्य = वध्वैश्वर्य

       ऋ+आ = र     पितृ + आदेश = पित्रादेश

 

 

दीर्घ सन्धि

   ह्रस्व या दीर्घ ,,,,लृ के बाद क्रमश: ह्रस्व या दीर्घ ,,,,लृ आ जाए तो दोनों को मिलाकार दीर्घ ,, हो जाता है। जैसे-

           अ+अ = आ

राम+अयन = रामायण            परम+अर्थ= परमार्थ

गीत+अंजली= गीतांजली           शत+अब्दी= शताब्दी

दीप+अवली= दीपावली            पर+अधीन= पराधीन

            अ+आ = आ  

शिव+आलय = शिवालय          धर्म+आत्मा = धर्मात्मा

दीर्घ+आयु = दीर्घायु              शरण+आगत = शरणागत

लोक+आयुक्त = लोकायुक्त        द्रौण+आचार्य = द्रौणाचार्य

            आ+अ = आ

  

 विद्या + अर्थी

विद्य् + आ + अ + र्थी

विद्य् + + र्थी  = विद्यार्थी

                   

 

तथा+अपि = तथापि              सुधा + अंशु = सुधांशु

कविता+अवली = कवितावली             वर्षा+अंत  = वर्षांत

 

आ+आ= आ

विद्या+आलय = विद्यालय  ( वि+द्++आ+आलय )

महा+आशय= महाशय            प्रेक्षा+आगार= प्रेक्षागार

वार्ता+आलाप= वार्तालाप

इ+इ=ई

अभि+इष्ट= अभीष्ट ( अ+भ्=इ+इ+ष्ट)

मुनि+इन्द्र= मुनीन्द्र        रवि+इन्द्र= रवीन्द्र

अति+इत = अतीत         अधि+ईक्षण= अधीक्षण

ई+इ = ई

योगी+इन्द्र= योगीन्द्र       सुधी+इन्द्र= सुधीन्द्र

मही+इन्द्र= महीन्द्र         लक्ष्मी+इच्छा= लक्ष्मीच्छा

 

इ + ई = ई

अभि+ईप्सा= अभीप्सा      परि+ईक्षा= परीक्षा

कवि+ईश्वर= कवीश्वर            गिरि+ईश= गिरीश

 

 ई + ई = ई

मही+ईश= महीश          रजनी+ईश= रजनीश

नदी+ईश= नदीश          नारी+ईश्वर= नारीश्वर

उ+उ = ऊ

गुरु+उपदेश= गुरूपदेश       भानु+उदय= भानूदय

अनु+उदित = अनूदित            सु+उक्ति= सूक्ति

 

उ+ऊ = ऊ

लघु+उर्मि= लघूर्मि         धातु+ऊष्मा= धातूष्मा

ऊ+उ = उ

वधू+उत्सव= वधूत्सव       चमू+उत्साह= चमूत्साह

वधू+उक्ति= वधूक्ति        भू+उपरि = भूपरि

ऊ+ऊ = ऊ

सरयू+ऊर्मि= सरयूर्मि             भू+ऊर्ध्व= भूर्ध्व

ऋ+ऋ = ऋ

मातृ+ऋण= मातृण         पितृ+ऋण= पितृण

 

 

विसर्ग सन्धि

           विसर्ग (:) के बाद स्वर या व्यंजन आने पर विसर्ग में जो परिवर्तन होता है , उसे विसर्ग सन्धि कहते हैं । विसर्ग सन्धि के कुछ नियम होते हैं जो इस प्रकार हैं –

नियम 1-   अ:+अ = ओ

नियम .2-    अ: + किसी वर्ग का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ वर्ण / य,,,,

                 = अ: के स्थान पर ‘ओ

             

   मन:+ज= मनोज             तप:+बल= तपोबल

   मन:+अभिलाषा=मनोभिलाषा    अध:+गति = अधोगति

 

नियम 2-   विसर्ग का र में परिवर्तित हो जाना—

           अ या आ से भिन्न स्वर ( : )  

                 +

    कोई स्वर/ किसी वर्ग का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ वर्ण/य,,,,

        =   विसर्ग(:) के स्थान पर र्

  आशी:+वाद = आशीर्वाद      नि:+आशा = निराशा

  दु:+उपयोग = दुरुपयोग      नि:+मल = निर्मल

 

नियम 3-   हृस्व स्वर(:) +र = विसर्ग का लोप होना तथा विसर्ग से पूर्व हृस्व का दीर्घ स्वर में बदलना –

नि: + रोग = नीरोग       नि: + रज = नीरज

नि: + रस = नीरस        नि: + रव = नीरव

 

नियम-4-     विसर्ग का श् में बदलना-स्वर (:)

         स्वर (:) + च,/छ,/श् = (:) के स्थान श्   

दु: + शासन = दुश्शासन    नि: + चय= निश्चय

यश: + शरीर = यश्शरीर    आ: + चर्य= आश्चर्य

 

नियम- 5    स्वर ( : ) + त/स = ( : ) के स्थान पर स्

          अ:/आ: + क/प + ( : ) के स्टैन पर स्

( इस नियम के अंतर्गत आने वाले शब्द नम:, तीर:, भा:, पुर:, श्रेय:, दु: आदि शब्दों से शुरू होते हैं। )

नम:+कार=  नमस्कार         नि:तेज = निस्तेज

दु:+साहस =  दुस्साहस        भा:+कर= भास्कर

 

नियम- 6    

        इ:/उ: + क,,,,,फ = (:) के स्थान पर ष् - 

दु:+कर= दुष्कर             चतु:+कोण= चतुष्कोण

नि:+फल= निष्फल          बहि:+कृत= बहिष्कृत

 

नियम - 7     अ ( : ) + क/प = विसर्ग में कोई परिवर्तन नहीं होता है।

  प्रात: + काल= प्रातःकाल        अंत:+करण= अन्तःकरण

 

नियम - 8      अ: + इ/ए = विसर्ग का लोप -

 अत:+एव= अतएव        यश:+इच्छा = यशइच्छा

 

         हिन्दी की कुछ संधियाँ

 

किसी= किस+ही           इसी= इस+ही

यही= यह+ही             जैसा= जो+ऐसा

यहीं= यह+ही             मुझी= मुझ+ही

कभी= कब+ही            उसी= उस+ही

 

    ऐसे शब्द जिनमें कोई शब्द संधि नहीं है फिर भी शब्द संधि जैसे लगते है-

 

सत्य + नाश = सत्यनाश         विश्व + मित्र = विश्वामित्र

दिवा + रात्रि = दिवरात्र           रघु + अ = राघव

समुदाय + इक = सामुदायिक      मौसी + एरा = मौसैरा

मूसल + धार= मूसलाधार         बात + ओला = बतोला

दिन + नाथ= दीनानाथ           मनु + अ = मानव

भूगोल + इक= भौगोलिक         साँप + एरा = सपेरा

 

 

 

व्यंजन  सन्धि


                        स्पर्शत्य -    क,,,,

                                     च,,,,

                                     ट,,,,

                                     त,,,,न             

                                     प,,,,म 

                            अंतस्थ -   य,,,

                             ऊष्म -    श,,,

 नियम –  - व्यंजन + व्यंजन

                 व्यंजन + स्वर

                  स्वर + व्यंजन

 

      नियम-1    यदि किसी वर्ग का पहला वर्ण + किसी भी वर्ग का तीसरा या चौथा वर्ण या ,,,, या कोई स्वर आए तो उसी पहले वर्ण के स्थान पर उसी वर्ग का तीसरा वर्ण आ जाएगा। जैसे-

 क   ⇢ 

ऋक् +वेद = ऋग्वेद             दिक्+गज= दिग्गज

दिक्+अंबर= दिगंबर             वाक्+ईश= वागीश

 

        च     ज

    अच्+अन्त= अजन्त          अच्+आदि= अजादि

 

       ट     ड

 शट्+अंग= षडंग      शट्+आनन= षडानन     षट्=दर्शन= षड्दर्शन


      प ब

अप्+द= अब्द                    अप्+ज= अब्ज

      त   द

जगत्+ईश=  जगदीश           उत्+गम=  उद्गम

तत्+भव=  तद्भव                उत्+आहरण=  उदाहरण

 

नियम-2         यदि किसी वर्ग का पहला वर्ण + , आये तो 

        तो उसी पहले वर्ण के स्थान पर उसी वर्ग का पाँचवाँ वर्ण आ जाएगा। जैसे-

 वाक्+मय= वाङ्मय        शट्+मास= षण्मास

जगत्+नाथ= जगन्नाथ      उत्+माद= उन्माद

सत्+नारी= सन्नारी        तत्+नाम= तन्नाम

 

नियम-3 

        त् + च/छ = च्च/च्छ -

          उत्+छेद = उच्छेद

 

नियम-4       (I)     त्/द् + श् = च्छ -

       (II)    कोई भी स्वर + च्छ

सत्+शास्त्र = सच्छास्त्र                 तत्+शिव= तच्छिव

श्रीमत्+शरच्चंद्र= श्रीमच्छरचंद्र         उत्+श्वास= उच्छवास

स्व+छंद = स्वच्छन्द                    आ+छादन= आच्छादन

पितृ+छाया = पितृच्छाया             अनु+छेद= अनुच्छेद

 

नियम-5       त् + ह =  द्ध

     ( हिन्दी व्याकरण की कुछ पुस्तकों में त् के स्थान पर द् का प्रयोग किया गया है जैसे, उत् की जगह उद्+हार =उद्धार । किन्तु छात्र इससे भ्रमित ना हो क्योंकि त् व द् दोनों का प्रयोग सही माना जाता है । )

     

उत्+हार = उद्धार          पत्+हति = पद्धति

उत्+हरण = उद्धरण        तत्+हित = तद्धित

 

नियम-6    यदि म् + क से भ तक कोई भी स्पर्श व्यंजन आ जाए तो म् के स्थान पर उसी वर्ग का पंचम वर्ण या   अनुस्वार आ जाएगा ।  जैसे –

 

सम्+देह=  सन्देह/ संदेह           सम्+भव=  संभव /सम्भव

वसुम्+धरा=  वसुंधरा/वसुन्धरा       तीर्थम्+कर= तीर्थंकर

अलम्+कार=  अलंकार             सम्+जय=  संजय

सम्=धि=  संधि/सन्धि             दम्+ड =  दंड/दण्ड         

शुभम्+कर=  शुभंकर              धनम्+जय=  धनंजय/धनञ्जय

 

नियम-7       यदि म् + य,,,,,,,ह हो तो म् के स्थान पर अनुस्वार हो जाएगा ।

 

म्+वाद =  संवाद           प्रियम्+वदा =  प्रियंवदा

म्+रक्षक=  संरक्षक         सम्+विधान=  संविधान

सम्+सार=  संसार          सम्+लग्न=  संलग्न

सम्+त्रास=  संत्रास          सम्+स्मरण=  संस्मरण

 

नियम- 8        यदि द् + क, , ,,स हो तो द् का त हो जाता है –

 

उद्=साह=  उत्साह                     विपद्+ति=  विपत्ति

संसद्+सदस्य=  संसत्सदस्य         तद्+पुरुष =  तत्पुरुष

संपद्+ति=  संपत्ति                      उद्+तर=  उत्तर

 

 

नियम- 9       ष + त = ष्ट

                  ष+थ =  ष्ठ

युधि+स्थिर = युधिष्ठिर      नि+स्था= निष्ठा

नि+स्नात= निष्णात         प्रति+स्थान= प्रतिष्ठान

कष्+त= कष्ट                   नि+स्थुर= निष्ठुर

 

 नियम-10      यदि सम् + कृत, कृति, कार, करण, कारक आदि का प्रयोग हो तो म् का अनुस्वार बन जाता है और स आ जाता है , इसी प्रकार यदि परि + कृत, कृति, कार, करण, कारक आदि का प्रयोग हो तो परि के बाद ष् का आगमन हो जाता है -

परि+कार=  परिष्कार         सम्+कृत=  संस्कृत

सम्+कार=  संस्कार            परि+कृत=  परिष्कृत

 

नियम-11        न के स्थान पर का प्रयोग

 

राम+अयन= रामायण       प्र + नाम = प्रणाम

शोष् + अन = शोषण      परि+मान = परिमाण

कृष्+न = कृष्ण                ऋ+न= ऋण

नियम-12    ,आ के अतिरिक्त कोई अन्य स्वर + स का प्रयोग हो तो स के स्थान पर ष हो जाएगा -

अभि=सेक= अभिषेक      नि+सिद्ध= निषिद्ध

वि+सम= विषम           उपनि+सद्= उपनिषद्

सु+समा= सुषमा           सु+स्मिता= सुष्मिता

 

नियम-13    न् का लुप्तिकरण -

 

मंत्रिन्+मण्डल= मंत्रिमण्डल             युवन्+राज= युवराज

पक्षिन्+गण= पक्षिगण                   प्राणिन्+विज्ञान= प्राणिविज्ञान